ईको फ्रेंडली तरीके से फतह किया माउंट एवरेस्ट 1

ईको फ्रेंडली तरीके से फतह किया माउंट एवरेस्ट

ईको फ्रेंडली तरीके से फतह किया माउंट एवरेस्ट 2

काठमांडू ।

जहां चाह-वहां राह।

भारतीय युवा पर्वतारोही हर्षवर्धन जोशी ने इसे सच कर दिखाया।

उन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को ईको फ्रेंडली तरीके से फतह कर दिया।

इस दौरान उन्होंने पर्यावरण के अनुकूल उपकरण व सामानों का प्रयोग कर पर्यावरण को बचाने का संदेश दिया।

वह अभी नवी मुंबई में रह रहे हैं।

उनका परिवार राजस्थान में सीकर के फतेहपुर में रहता है।

पिता योगेश जोशी और मां मंजू शर्मा हैं।

करीब 10 साल पहले उन्हें पर्वतारोहण का शौक लगा था।

तीन सदस्यीय टीम के हिस्सा: 24 वर्षीय हर्षवर्धन ने 23 मई को पर्वतारोहण पूरा किया।

वह सातोरी एडवेंचर एवरेस्ट अभियान की तीन सदस्यीय टीम का हिस्सा थे, जिसमें नेपाली फुरते शेरपा और अनूप राय भी शामिल थे।

एवरेस्ट के दो बेस कैंप-
दक्षिणी बेस कैंप नेपाल और उत्तरी तिब्बत की सीमा में स्थित।

दक्षिणी बेस कैंप के लिए लंबे पैदल रास्ते का प्रयोग होता है।

उत्तरी बेस कैंप तक सड़क, टूरिस्ट स्थल सा रहता नजारा।

इसलिए महत्त्वपूर्ण-
10 टन कचरा साफ करने का 2019 में तय किया था लक्ष्य
150 रुपए मिलते हैं शेरपाओं को एक किलो कचरा लाने पर
17 से 28 लाख तक लेती हैं नेपाली एजेंसियां पर्वतारोहण के लिए
300 पर्वतारोहियों की अब तक मौत

कोविड प्रोटोकॉल की पूरी पालना-
चढ़ाई के दौरान टीम ने हीटिंग और अन्य उद्देश्यों के लिए पर्यावरण को दुष्प्रभाव पहुंचाने वाले डीजल समेत अन्य चीजों का प्रयोग नहीं किया।

इसके लिए मोबाइल सोलर पैनल का प्रयोग किया।

इस दौरान कोविड-19 के प्रोटोकॉल का पालन करने के कारण देरी हुई और कई बार तूफानों का सामना करना पड़ा लेकिन हिम्मत नहीं हारी।

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