AMAZING : जानिए क्यों 123 दिन तक हथकड़ी में रहा यह कपल 1

AMAZING : जानिए क्यों 123 दिन तक हथकड़ी में रहा यह कपल

यूक्रेन के एलेक्सांद्र कुडले और उनकी मंगेतर को जब लगा कि वे एक-दूसरे को समय नहीं दे पा रहे और रिश्ता टूटने के कगार पर पहुंच गया तो उन्होंने एक अनोखी युक्ति अपनाई।

दोनों ने इस वर्ष वेलेंटाइन डे पर खुद को हथकड़ी में बांध लिया, जिसे 17 जून को राजधानी कीव में खोला गया।

यह कपल 123 दिन तक हथकड़ी में रहा, जिसे यूक्रेन की रेकॉर्ड बुक में दर्ज किया गया है।

जिस वक्त रेकॉर्ड अधिकारी ने दोनों की हथकड़ी काटी, उस वक्त देशभर का मीडिया मौजूद था।

दोनों ने अपने फोटो और अनुभवों को सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिसे खूब पसंद किया गया।

इंस्टाग्राम पर उनके 78 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हो गए हैं।

हथकड़ी करेंगे नीलाम : कपल अब इस हथकड़ी को नीलाम करने पर विचार कर रहे हैं।

इससे मिलने वाली राशि को वे जरूरतमंदों के लिए दान करेंगे।

क्या निष्कर्ष निकलाकुडले ने बताया कि…

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BIRDS : जानिए, कितने परिंदे हैं धरती पर 2

BIRDS : जानिए, कितने परिंदे हैं धरती पर

परिंदे, जीवन और जैव विविधता का जरूरी हिस्सा हैं।

खुले आसमान में विचरण करने वाले परिंदों की गणना तो संभव नहीं, लेकिन पिछले दिनों वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि धरती पर 50 अरब से ज्यादा परिंदे रहते हैं।

ऑस्ट्रेलिया की न्यू साउथवेल्स यूनिवर्सिटी के कोरे कैलागन की अगुवाई में हुआ यह अध्ययन, पिछले दिनों प्रोसिडिंग्स ऑफ द यूएस नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

न्यू साउथवेल्स के शोधकर्ताओं का अनुमान है कि पृथ्वी पर 50 अरब से 428 अरब के बीच पक्षियों की संख्या है।

ये है अध्ययन का आधारशोधकर्ताओं ने ई-बर्ड के आंकड़ों और एल्गोरिद्म की मदद से यह अनुमान लगाया।

ई-बर्ड पर दुनिया के 6 लाख सिटिजन साइंटिस्ट के डेटा सुरक्षित हैं।

किस प्रजाति के कितने परिंदे 1.6 अरब आबादी गोरैया (घरेलू चिडिय़ा) की है, सबसे ज्यादा।

1.3 अरब हैं यूरोपीय मैना1.2 अरब रिंग-बिल्ड गल (समुद्री पक्षी)1.1 अरब बार्न स्वालो हैं विश्व में ये परिंदे…

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इस अनूठे परिंदे का रहस्य खोलेगा अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़ा डिवाइस 3

इस अनूठे परिंदे का रहस्य खोलेगा अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़ा डिवाइस

लंबी दूरी तक यात्रा करने वाले अमरीकी पक्षी ‘रॉबिन’ का रहस्य प्राणी विज्ञानियों के लिए हमेशा पहेली बना रहा है।

इस पहली को सुलझाने के लिए पारिस्थितिकी विज्ञानी एमिली विलियम ने इनके पैरों में जीपीएस ट्रैकिंग डिवाइस लगाया है, जो यात्रा को ट्रैक करने के साथ इसकी आनुवांशिक थ्योरी और पर्यावरणीय घटकों का पता लगाएगा।

अंतरिक्ष स्टेशन से होगा टै्रकअंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर लगे एंटिना के माध्यम से यह डिवाइस रॉबिन को ट्रैक करेगा।

स्टेशन पर यह एंटिना दो वर्ष पहले लगाया गया था, लेकिन इसकी बिजली आपूर्ति और कंप्यूटर में आई गड़बड़ी के कारण यह निष्क्रिय था।

अब इसे फिर से चालू किया गया है।

वसंत का लाता है संदेश : उत्तरी अमरीका का सुरीला रॉबिन यहां जलवायु दूत की तरह है।

इसकी सुरीली आवाज वसंत ऋतु के आगमन का संदेश देती है।

अमरीका में इसकी सात प्रमुख प्रजातियां हैं।

यह कुछ यूरोपीय देशों में भी पाया जाता है।

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हिमाचल की इस झील में छिपा है अरबों का खजाना, फिर कोई नहीं करता निकालने की कोशिश 4

हिमाचल की इस झील में छिपा है अरबों का खजाना, फिर कोई नहीं करता निकालने की कोशिश

नई दिल्ली।

भारत का पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश ( Himachal Pradesh ) अपने पौराणिक महत्त्व के साथ-साथ रहस्यों का गढ़ भी माना जाता है।

बर्फ की चादर ओढ़े यहां कई ऐसी जगहें मौजूद हैं, जिनका प्रचीन इतिहास अपने अंदर कई गहरे राज्य समेटे हुए है।

यही नहीं यहां के कुछ स्थलों की पहचान तो महाभारत काल से की गई है, वहीं कुछ स्थल अब भी रहस्यमयी बने हुए हैं।

इन रहस्यों में छिपे अरबों-खरबों के खजाने के राज।

हिमाचल प्रदेश में ऐसी एक झील (Lake) है, जिसमें अरबों-खरबों का खजाना छिपा हुआ है।

हालांकि, अब तक किसी ने इस झील से खजाना निकालने की कोशिश नहीं की है।

यह भी पढ़ेँः AMAZING : आप भी चौंक जाएंगे कोरोनावायरस का वजन सुनकर हम किसी भूखंड की नहीं, बल्कि हिमाचल में मौजूद एक ऐसी झील की बात करेंगे, जहां अरबों-खरबों का खजाना गढ़े होने की बात कही जाती है।

कमरुनाग झील हिमाचल…

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AMAZING : आप भी चौंक जाएंगे कोरोनावायरस का वजन सुनकर 5

AMAZING : आप भी चौंक जाएंगे कोरोनावायरस का वजन सुनकर

आपने शायद ही कभी सोचा हो कि दुनिया के लिए संकट का सबब बने कोरोनावायरस को एक जगह इकट्ठा करें तो कितना वजन होगा? इजराइल के वीजमैन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के वैज्ञानिकों ने हाल ही इस वायरस के वजन का अनुमान लगाया है।

कोरोना वायरस ने महामारी के समय में किसी भी जगह पर एक मौके पर 10 लाख से 1 करोड़ लोगों को संक्रमित किया है।

इसी को आधार मानकर वैज्ञानिकों ने पूरी दुनिया में फैले कोरोना वायरस के वजन की गणना की है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि दुनिया में इस वक्त मौजूद कोरोना वायरस का कुल वजन 0.1 से लेकर 10 किलोग्राम तक हो सकता है।

वैज्ञानिकों ने यह अनुमान संक्रमितों की संख्या के आधार पर लगाया है।

शोधकर्ता रॉन मिलो का कहना है कि कम वजन का अर्थ यह नहीं कि वह कम खतरनाक है।

इस वक्त दुनिया में 17.3 करोड़ से ज्यादा संक्रमित हैं और…

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ईको फ्रेंडली तरीके से फतह किया माउंट एवरेस्ट 6

ईको फ्रेंडली तरीके से फतह किया माउंट एवरेस्ट

काठमांडू ।

जहां चाह-वहां राह।

भारतीय युवा पर्वतारोही हर्षवर्धन जोशी ने इसे सच कर दिखाया।

उन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को ईको फ्रेंडली तरीके से फतह कर दिया।

इस दौरान उन्होंने पर्यावरण के अनुकूल उपकरण व सामानों का प्रयोग कर पर्यावरण को बचाने का संदेश दिया।

वह अभी नवी मुंबई में रह रहे हैं।

उनका परिवार राजस्थान में सीकर के फतेहपुर में रहता है।

पिता योगेश जोशी और मां मंजू शर्मा हैं।

करीब 10 साल पहले उन्हें पर्वतारोहण का शौक लगा था।

तीन सदस्यीय टीम के हिस्सा: 24 वर्षीय हर्षवर्धन ने 23 मई को पर्वतारोहण पूरा किया।

वह सातोरी एडवेंचर एवरेस्ट अभियान की तीन सदस्यीय टीम का हिस्सा थे, जिसमें नेपाली फुरते शेरपा और अनूप राय भी शामिल थे।

एवरेस्ट के दो बेस कैंप- दक्षिणी बेस कैंप नेपाल और उत्तरी तिब्बत की सीमा में स्थित।

दक्षिणी बेस कैंप के लिए लंबे पैदल रास्ते का प्रयोग होता…

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AMAZING VACCINATION : लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए दुनिया में कैसे-कैसे वैक्सीनेशन सेंटर 7

AMAZING VACCINATION : लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए दुनिया में कैसे-कैसे वैक्सीनेशन सेंटर

कोरोना से मुकाबले के लिए पूरी दुनिया में इस वक्त टीकाकरण पर जोर है।

लेकिन कई जगह दुष्प्रचार और अविश्वास के कारण लोग वैक्सीन लगवाने से झिझक रहे हैं।

इसे दूर करने और टीकाकरण को बढ़ावा देने के लिए कई देशों ने संग्रहालय, पार्क या स्टेडियम को वैक्सीनेशन साइट बनाया गया है।

जहां लोग वैक्सीन के बाद सेल्फी का शौक भी पूरा कर रहे हैं।

डिज्नीलैंड पेरिस फ्रांस में डिज्नीलैंड को कोविड-19 वैक्सीनेशन साइट में बदल दिया गया।

यहां वीकेंड पर लोगों को वैक्सीन लगाई गई।

हालांकि डिज्नीलैंड 17 जून से सैलानियों के लिए खोल दिया जाएगा।

मंडेन ज्योतिष में जानिए, अभी कितने महीने और रहेगा कोरोना का असर न्यूयॉर्क म्यूजियम अप्रेल में न्यूयॉर्क के अमरीकन म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री में कोविड-19 टीकाकरण की शुरुआत हुई।

इस अभियान में लोगों ने संग्रहालय में बनी 94 फुट की विशाल ब्लू व्हेल मॉडल के नीचे वैक्सीन लगवाई।

यहां व्हेल को भी बैंडेड…

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अफ्रीका की गुफा में 78 हजार साल पुरानी कब्र मिली 8

अफ्रीका की गुफा में 78 हजार साल पुरानी कब्र मिली

नई दिल्ली।

शोधकर्ताओं को अफ्रीका में 78 हजार साल पुरानी कब्र मिली है।

यह करीब तीन साल के एक बच्चे की है, जिसके पैरों को छाती की ओर मोड़कर दफनाया गया था।

माना जा रहा है कि यह अफ्रीका की सबसे पुरानी कब्र है।

कब्र केन्या तट के पास एक गुफा के भीतर मिली।

वहां कुछ आभूषण, चढ़ावा और मिट्टी की नक्काशी भी मिली है।

इससे अंदाजा लगाया गया कि यह पाषाण युग की कब्र है।

साइंस जर्नल ‘नेचर’ ने विस्तृत रिपोर्ट दी है।

यह स्पष्ट नहीं है कि दफनाया गया बच्चा लड़का है या लड़की।

इसे कफन में सलीके से लपेटा गया।

इसका सिर शायद तकिए पर रखा गया था।

स्पेन के बुरगोस नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन ह्यूमन इवोल्यूशन की निदेशक मारिया मार्टिनोन टोरेस का कहना है कि शायद तब समुदाय अंतिम संस्कार की परंपरा को मानता था।

इससे पहले 2013 में पांगा या सैदी गुफा में एक बच्चे…

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रोचक : ऑनलाइन खरीदे सेब, डिलिवरी में आया आइफोन 9

रोचक : ऑनलाइन खरीदे सेब, डिलिवरी में आया आइफोन

नई दिल्ली।

यूके के एक शख्स ने ऑनलाइन सेब खरीदने का ऑर्डर किया था, लेकिन जब डिलिवरी बॉक्स खोला तो सब हैरान रह गए।

इसमें एपल का आइफोन था।

50 साल के निक जेम्स ने एक ऑनलाइन ग्रॉसरी वेबसाइट से सेब ऑर्डर किए थे।

इसके बाद वह अपना सामान लेने कंपनी के स्थानीय स्टोर पर गए।

वहां बताया गया कि उनके सामान के साथ एक सरप्राइज बॉक्स भी है।

जेम्स ने यह बॉक्स खोलकर देखा तो हैरान रह गए।

इसमें एक आइफोन था।

जेम्स ने अपनी इस खुशी का इजहार ट्विटर पर भी किया है।

उन्होंने लिखा कि हमने तो सेब का ऑर्डर दिया था और मिला आइफोन।

यों मिला फोन- जेम्स ने बताया कि मुझे लग रहा था कि यह सरप्राइज ईस्टर एग या कुछ और हो सकता है।

जब बॉक्स खोला तो मैं हैरान रह गया।

दरअसल यह प्रमोशनल कैंपेन का हिस्सा है।

कंपनी अपने ग्राहकों को अलग-अलग…

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ऐसे हुआ जीन्स पैंट का आविष्कार 10

ऐसे हुआ जीन्स पैंट का आविष्कार

उद्योगीकरण के बाद यूरोप में कामगारों और नाविकों के लिए ऐसे परिधानों की जरूरत महसूस की गई, जो मजबूत हों और देर से फटें।

सोलहवीं सदी में यूरोप ने भारतीय मोटा सूती कपड़ा मंगाना शुरू किया।

जिसे डुंगारी कहा जाता था।

बाद में इसे नील के रंग में रंग कर मुंबई के डोंगारी किले के पास बेचा गया था।

नाविकों ने इसे अपने अनुकूल पाया और इससे बनी पतलूनें पहनने लगे।

कंधे से लेकर पाजामे तक का यह परिधान डंगरी कहलाता है।

लगभग ऐसा ही परिधान कार्गो सूट होता है।

जिसे नाविक और वायुसेवाओं के कर्मचारी पहनते हैं।

डंगरी के कपड़े और जीन्स में फर्क यह होता है कि जहां डंगरी में धागा रंगीन होता है।

वहीं, जीन्स को तैयार करने के बाद रंगा जाता है।

आमतौर पर जीन्स नीले, काले और ग्रे शेड्स में होती हैं।

इन्हें जिस नील से रंगा जाता था।

वह भारत या अमरीका से आती…

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