संन्यासी योगी की सरकार, आखिर क्यों दोहराना चाहती है 'कुम्भ' की दास्तान? 1

संन्यासी योगी की सरकार, आखिर क्यों दोहराना चाहती है ‘कुम्भ’ की दास्तान?

नई दिल्लीः पिछले डेढ़ साल में दुनिया के तमाम देशों के लोग इस हकीकत के गवाह बने हैं कि कोरोना के वायरस ने न किसी का धर्म देखा, न जात देखी और न ही उम्र. वह सबको समान रुप से अपनी चपेट में लेता रहा और यह सिलसिला अभी पूरी तरह से थमा नहीं है. लेकिन शायद अकेला हमारा देश ही ऐसा है, जहां इस महामारी पर भी धर्म की आस्था भारी पड़ रही है.

कोरोना की दूसरी लहर के बीच हमने हरिद्वार के कुंभ में जुटी लाखों लोगों की भीड़ के दृश्य देखे और फिर उसका नतीजा भी भुगता, और अब जबकि देश के तमाम डॉक्टर-विशेषज्ञ तीसरी लहर आने के लिए आगाह कर रहे हैं, तब उत्तर प्रदेश की सरकार ने कांवड़ यात्रा निकालने की इजाजत दे दी है. सिर्फ डॉक्टर ही नहीं बल्कि कोई भी समझदार इंसान इस फैसले को उचित नहीं कहेगा. जहां लाखों…

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कोविड ने औरतों की सेहत पर क्या असर किया है, इस पर रिसर्च तो कीजिए 2

कोविड ने औरतों की सेहत पर क्या असर किया है, इस पर रिसर्च तो कीजिए

अभी हाल ही में अमेरिका से यह खबर आई थी कि वहां 2020 में बायोमेडिकल क्षेत्र में पेटेंट हासिल करने वाले इनवेंटर्स में सिर्फ 12.8% औरतें हैं. इस सिलसिले में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल की एक स्टडी की याद आती है जिसमें कहा गया था कि अगर महिला बायोमेडिकल इनवेंटर्स की संख्या ज्यादा होगी तो महिलाओं की सेहत में 35% सुधार होगा. कोविड-19 ने महिलाओं की मैन्स्ट्रुअल हेल्थ को जिस तरह प्रभावित किया है, उससे महिला डॉक्टरों, वैज्ञानिकों और रिसर्चर्स का महत्व खास तौर से समझ आता है. भला औरतों की सेहत का ख्याल रखना, औरतों को ही जरूरी क्यों लगना चाहिए?

कोविड-19 ने औरतों पर कहर ढाया है

कोविड-19 के जो तमाम असर हैं, उनमें से एक असर मैन्स्ट्रुअल हेल्थ पर भी पड़ा है. कोविड से संक्रमित महिलाओं के मैन्स्ट्रुअल साइकिल बहुत बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. न्यूज रिपोर्ट्स बताती हैं कि ऐसी बहुत सी महिलाएं हैं…

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