देश की माली हालत को किस हद तक सुधरने देगा ओमिक्रोन वायरस? 1

देश की माली हालत को किस हद तक सुधरने देगा ओमिक्रोन वायरस?

कोरोना (Corona) के बढ़ते खतरों के बीच एक अच्छी खबर ये आई है कि देश की अर्थव्यवस्था (Economy) की माली हालत कुछ सुधरने लगी है और पिछले वित्तीय साल के मुकाबले मौजूदा चालू वित्त वर्ष (Financial Year) यानी 2021-22 में जीडीपी (GDP) 9.2 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है. लेकिन इस लक्ष्य को तभी हासिल किया जा सकता है जबकि राज्यों में सम्पूर्ण लॉकडाउन (Lockdown) लगाने की नौबत न आने पाये. अगर ओमिक्रोन (Omicron) वायरस मुंबई (Mumbai) व दिल्ली (Delhi) की तरह ही बाकी राज्यों में भी अपना कहर बरपाते हुए जानलेवा साबित होने लगा, तब सरकारों के पास भी लॉकडाउन लगाने के सिवा कोई और रास्ता नहीं बचेगा. ऐसी सूरत में इकॉनमी (Economy) के इंजन को पटरी से उतरने में ज्यादा देर नहीं लगेगी.

कोरोना के बढ़ते मामलों के बावजूद महाराष्ट्र व दिल्ली की सरकार पूर्ण लॉकडाउन लगाने से फिलहाल परहेज़ कर रही हैं क्योंकि…

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GoodBye 2021: कहने भर को नहीं, सचमुच बदल गया है एंटरटेनमेंट 2

GoodBye 2021: कहने भर को नहीं, सचमुच बदल गया है एंटरटेनमेंट

GoodBye 2021:  कोरोना (Coronavirus) ने दुनिया के जिन क्षेत्रों में बड़े बदलाव लाए हैं, उनमें एंटरटेनमेंट (Entertainment Industry) प्रमुख है. अव्वल तो इस महामारी ने ओटीटी (OTT) को भारत में घर-घर की चीज बना दिया और इसी का नतीजा निकला कि अचानक कहानियां ग्लोबल होने लगीं. सितारे भाषाई सीमाएं तोड़ने लगे. फिल्मों के सामने वेब सीरीज खड़ी हो गईं. दर्शकों ज्यादा मुखर होकर दिल मांगे मोर का शोर करने लगे. मनोरंजन के फार्मूले फेल हुए और नए आइडिया की मांग बढ़ गई. सिनेमाघर (Box Office) से ओटीटी (OTT) तक भाषा डब होने और सब-टाइटल्स में बदलने लगी. कंटेंट अच्छा है, मनोरंजक है, विचारोत्तेजक है तो दर्शक हर स्थिति में उसे देखने को तैयार है. अब यह कहने की बात नहीं है कि एंटरटेनमेंट बदल गया है. 2021 ने साबित कर दिया कि सचमुच ऐसा हो चुका है.

सिनेमा की वर्तमान स्थिति

हिंदी का दर्शक अब…

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कोरोना: चीन, रुस व ब्रिटेन के बाद क्या भारत में भी आने वाली है तीसरी लहर? 3

कोरोना: चीन, रुस व ब्रिटेन के बाद क्या भारत में भी आने वाली है तीसरी लहर?

अगर आप कोरोना जैसी बेमुराद बीमारी से बचने के लिए उसके एक या दोनों डोज लगवा चुके हैं,  तब भी चौड़े होकर मत घूमिये,  बल्कि पूरी सावधानी बरतने की तरफ खास ध्यान दीजिये. सिर्फ इसलिए नहीं कि दिवाली का त्योहार है, बल्कि डराने वाला सच ये है कि इस वायरस ने फिर उसी चीन में कहर बरपाना शुरु कर दिया है जहां इसने पैदा होकर पूरी दुनिया में तबाही मचाई. इसने रुस,  ब्रिटेन, सिंगापुर समेत कुछ और यूरोपीय देशों में भी फिर से अपना तांडव दिखाना शुरु कर दिया है जिसके कारण वहां दोबारा लॉक डाउन लगाने की नौबत आ चुकी है.

कोई भी वैज्ञानिक या महामारी का विशेषज्ञ डॉक्टर दावे के साथ तारीख तो नहीं बता सकता कि ये भारत में कब दस्तक देने वाला है लेकिन वे सभी ये मानते हैं कि एक बार ये वायरस अपना रंग जरुर दिखायेगा, जिसे हम कोरोना की तीसरी…

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देश के वीआईपी कल्चर को खत्म करने का जरिया बना कोरोना का वैक्सीन अभियान? 4

देश के वीआईपी कल्चर को खत्म करने का जरिया बना कोरोना का वैक्सीन अभियान?

कोरोना महामारी ने दुनिया भर में जितना हाहाकार मचाया, उससे ज्यादा हंगामा हमारे यहां विपक्षी दलों ने पहले इस बीमारी से लड़ने के तरीकों और फिर इसकी वैक्सीन को लेकर किया था. भारत दुनिया का अकेला ऐसा देश था जहां वैक्सीन को लेकर इतनी सियासत की गई. मोदी सरकार को पहले इसलिये कोसा गया कि वो वैक्सीन नहीं ला पा रही है. जब सरकार ने दो देशी कंपनियों को इसे बनाने की मंजूरी दे दी, तब इस पर बवाल किया गया कि वो इतनी प्रभावी साबित नहीं होगी और सरकार ने ये फैसला जल्दबाज़ी में लिया है. उसके बाद इस साल जुलाई तक जब देश में 47 करोड़ लोग टीके की पहली ख़ुराक ले चुके थे, तब विपक्ष ने वैक्सीन की कमी होने का रोना रोते हुए सरकार पर तमाम तरह के सवाल उठाये. लेकिन गुरुवार को सौ करोड़ लोगों के टीकाकरण का लक्ष्य पूरा करके सरकार ने विपक्ष…

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कोरोना के नए मामलों से डरा चीन क्या हमारे लिए भी खतरे का पैगाम लाएगा? 5

कोरोना के नए मामलों से डरा चीन क्या हमारे लिए भी खतरे का पैगाम लाएगा?

दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश में शुमार अकेला भारत ही है,जहां सौ करोड़ लोगों को कोरोना वायरस से जंग लड़ने का एक टीका लग चुका है औऱ गुरुवार को सरकार ने इस अवसर को एक उत्सव के रुप मनाया है. लेकिन जश्न की ये खुमारी कहीं हमारे लिए दोबारा किसी खतरे का अंदेशा तो नहीं दे रही है? ये सवाल इसलिये कि कोरोना महामारी का जन्मदाता चीन है, जहां से कोविड-19 वायरस की शुरुआत दिसम्बर 2019 में हुई थी. उसी चीन में अब इस वायरस के एक नए रुप का पता लगने के बाद वहां के कई प्रांतों में लॉकडाउन लगा दिया गया है. चीन ने अपने यहां से उड़ान भरने वाली सैंकड़ों फ्लाइट कैंसल कर दी है और बच्चों के स्कूल बंद कर दिए गए हैं. 

जाहिर है कि ये जानकर भारत समेत दुनिया के किसी भी देश का कोई नागरिक खुश नहीं बल्कि…

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200 साल तक राज करने वाले अंग्रेजों को मोदी सरकार से क्यों मिला ये करारा जवाब? 6

200 साल तक राज करने वाले अंग्रेजों को मोदी सरकार से क्यों मिला ये करारा जवाब?

जो लोग अखंड भारत में पैदा हुए, जिये और फिर दुनिया से विदा हो गए, उनमें से कुछ लोगों के कड़वे-मीठे अनुभव वाली पुस्तकें आज भी आपको किसी लाइब्रेरी में मिल जाएंगी. उनका लुब्बे लुबाब इतना ही है कि जिन अंग्रेजों ने तकरीबन दो सौ साल तक हमारे प्राचीन आर्यावर्त पर राज किया और फिर अपने स्वार्थ के ख़ातिर इसे कई हिस्सों में बांट दिया, उन ब्रिटिशसर पर कभी भरोसा नहीं करना है. औऱ, गुलामी की जंजीरों  से मुक्ति मिलने के बाद अगर आज़ाद हिंदुस्तान की किसी भी सरकार ने इन पर आंख मूंदकर भरोसा किया, तो वो उसकी सबसे बड़ी भूल होगी जिसकी कीमत आने वाली न जाने कितनी पीढ़ियों को चुकानी पड़ेगी.

बेशक, भारत के आज़ाद होने के 75 साल बाद ब्रिटेन आज भारत का अच्छा दोस्त है और हम भी उससे  बराबरी की दोस्ती निभा रहे हैं, ये जानते हुए भी कि उसने हमारे…

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BLOG: कोरोना की दूसरी लहर से निपटने में राष्ट्रपति ने सरकार को दी क्लीन चिट 7

BLOG: कोरोना की दूसरी लहर से निपटने में राष्ट्रपति ने सरकार को दी क्लीन चिट

कोरोना की दूसरी लहर से निपटने में ढिलाई बरतने पर देश-विदेश के मीडिया में मोदी सरकार को जिस आलोचना का सामना करना पड़ा था, उसे देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दरकिनार करते हुए आज सरकार को एक तरह से ‘क्लीन चिट’ दे दी है. भारत की आजादी की 75वीं वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर देश को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में इस महामारी का मुकाबला पूरी मजबूती से करने के लिए न सिर्फ सरकार की पीठ थपथपाई बल्कि दुनिया के उन विकसित मुल्कों से इसकी तुलना भी करी, जो इस संकट का सामना करने में पूरी तरह से सफल नहीं हो सके.

‘महामारी का डटकर किया सामना’
राष्ट्रपति ने कहा कि “कोविड की दूसरी लहर से हमारी सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे पर बहुत दबाव पड़ा है. सच तो यह है कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं समेत, किसी भी देश का बुनियादी ढांचा, इस…

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देश में कोरोना टीकाकरण की धीमी रफ़्तार के बीच 'डेल्टा' वेरिएंट का बढ़ता कहर 8

देश में कोरोना टीकाकरण की धीमी रफ़्तार के बीच ‘डेल्टा’ वेरिएंट का बढ़ता कहर

Coronavirus vaccination: दुनिया के सौ से भी ज्यादा देशों में कोरोना वायरस के डेल्टा वेरिएंट ने अपना असर दिखाना शुरु कर दिया है और भारत में भी संक्रमण के मामले अचानक से बढ़ने लगे हैं. ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि क्या केंद्र सरकार दिसंबर तक सबको वैक्सीन लगाने के अपने लक्ष्य को पूरा कर पायेगी? यह सवाल इसलिये क्योंकि मोदी सरकार ने जून की शुरुआत में यह दावा किया था कि इस साल के अंत तक देश के सभी 100 करोड़ लोगों को कोविड-19 की वैक्सीन मिल जाएगी. सभी 100 करोड़ लोगों का पूरी तरह टीकाकरण करने के लिए 200 करोड़ वैक्सीन डोज़ की ज़रूरत होगी, जो फ़िलहाल पूरी होते नहीं दिखती और शायद यही कारण है कि हमारे यहां टीकाकरण की रफ्तार भी धीमी है.

अब तक कुल 45 करोड़ 60 लाख लोगों को वैक्सीन लग चुकी है लेकिन इनमें से सिर्फ 9.99 करोड़…

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संन्यासी योगी की सरकार, आखिर क्यों दोहराना चाहती है 'कुम्भ' की दास्तान? 9

संन्यासी योगी की सरकार, आखिर क्यों दोहराना चाहती है ‘कुम्भ’ की दास्तान?

नई दिल्लीः पिछले डेढ़ साल में दुनिया के तमाम देशों के लोग इस हकीकत के गवाह बने हैं कि कोरोना के वायरस ने न किसी का धर्म देखा, न जात देखी और न ही उम्र. वह सबको समान रुप से अपनी चपेट में लेता रहा और यह सिलसिला अभी पूरी तरह से थमा नहीं है. लेकिन शायद अकेला हमारा देश ही ऐसा है, जहां इस महामारी पर भी धर्म की आस्था भारी पड़ रही है.

कोरोना की दूसरी लहर के बीच हमने हरिद्वार के कुंभ में जुटी लाखों लोगों की भीड़ के दृश्य देखे और फिर उसका नतीजा भी भुगता, और अब जबकि देश के तमाम डॉक्टर-विशेषज्ञ तीसरी लहर आने के लिए आगाह कर रहे हैं, तब उत्तर प्रदेश की सरकार ने कांवड़ यात्रा निकालने की इजाजत दे दी है. सिर्फ डॉक्टर ही नहीं बल्कि कोई भी समझदार इंसान इस फैसले को उचित नहीं कहेगा. जहां लाखों…

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कोविड ने औरतों की सेहत पर क्या असर किया है, इस पर रिसर्च तो कीजिए 10

कोविड ने औरतों की सेहत पर क्या असर किया है, इस पर रिसर्च तो कीजिए

अभी हाल ही में अमेरिका से यह खबर आई थी कि वहां 2020 में बायोमेडिकल क्षेत्र में पेटेंट हासिल करने वाले इनवेंटर्स में सिर्फ 12.8% औरतें हैं. इस सिलसिले में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल की एक स्टडी की याद आती है जिसमें कहा गया था कि अगर महिला बायोमेडिकल इनवेंटर्स की संख्या ज्यादा होगी तो महिलाओं की सेहत में 35% सुधार होगा. कोविड-19 ने महिलाओं की मैन्स्ट्रुअल हेल्थ को जिस तरह प्रभावित किया है, उससे महिला डॉक्टरों, वैज्ञानिकों और रिसर्चर्स का महत्व खास तौर से समझ आता है. भला औरतों की सेहत का ख्याल रखना, औरतों को ही जरूरी क्यों लगना चाहिए?

कोविड-19 ने औरतों पर कहर ढाया है

कोविड-19 के जो तमाम असर हैं, उनमें से एक असर मैन्स्ट्रुअल हेल्थ पर भी पड़ा है. कोविड से संक्रमित महिलाओं के मैन्स्ट्रुअल साइकिल बहुत बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. न्यूज रिपोर्ट्स बताती हैं कि ऐसी बहुत सी महिलाएं हैं…

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