SherShaah कैप्‍टन विक्रम बत्रा, कारगिल का हीरो जिसने कहा था 'तिरंगे में लिपटा ही सही मैं आऊंगा जरूर' 1

SherShaah कैप्‍टन विक्रम बत्रा, कारगिल का हीरो जिसने कहा था ‘तिरंगे में लिपटा ही सही मैं आऊंगा जरूर’

SherShaah कैप्‍टन विक्रम बत्रा, कारगिल का हीरो जिसने कहा था 'तिरंगे में लिपटा ही सही मैं आऊंगा जरूर' 2

सिद्धार्थ मल्‍होत्रा () की फिल्‍म ‘शेरशाह’ का टीजर (SherShaah Teaser) गुरुवार को रिलीज हो गया है।

यह फिल्‍म कारगिल युद्ध के हीरो कैप्‍टन विक्रम बत्रा () की बायॉपिक है।

विक्रम बत्रा जिनके नाम से पाकिस्‍तान में छुपे बैठे दुश्‍मन भी थर-थर कांपते थे।

वो विक्रम बत्रा जिनके पराक्रम को देख दुश्‍मन की सेना ने ही उन्‍हें ‘शेरशाह’ कोड नेम दिया था।

‘शेरशाह’ यानी ‘शेरों का राजा।

‘ करीब डेढ़ मिनट के टीजर में हमें सिर्फ सिद्धार्थ मल्‍होत्रा ही नहीं दिखते।

हमें कैप्‍टन विक्रम मल्‍होत्रा भी नजर आते हैं।

उनकी जिंदादिल आवाज सुनाई देती है।

तोप के गोलों की गूंज के बीच कैप्‍टन विक्रम बत्रा की आवाज रोंगटे खड़े कर देती है।

कैप्‍टन बत्रा 7 जुलाई 1999 को युद्ध में शहीद हुए।

उन्‍हें परमवीर चक्र से सम्‍मानित किया गया।

लेकिन उनके साहस की यह कहानी सिर्फ इन चार पंक्‍त‍ियों तक सिमित नहीं है।

‘जिंदा वापसी होती तो आर्मी के हेड होते’हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में 9 सितंबर 1974 को कैप्‍टन विक्रम बत्रा का जन्‍म हुआ था।

पालमपुर में घुग्गर गांव में आज भी उनकी बहादुरी की कसमें खाई जाती हैं।

देश की मिट्टी के लिए अपनी जान न्‍योछावर करने वाले कैप्‍टन बत्रा ने कारगिल के पांच सबसे महत्‍वपूर्ण पॉइंट्स को जीतने में मुख्‍य भूमिका निभाई थी।

जोश और साहस ऐसा कि गोलियों से छलनी होने के बाद भी वह मरने से पहले अपने साथियों को बचाते रहे।

खुद चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ वेद प्रकाश मलिक ने तब कहा था कि यदि कैप्‍टन विक्रम बत्रा जिंदा वापसी करते तो वह इंडियन आर्मी के हेड बन गए होते।

वह महज 24 साल की उम्र में शहीद हुए, लेकिन अपने पीछे यादों, जज्‍बातों का ऐसा समंदर छोड़ गए, जिसमें हर हिंदुस्‍तानी का मन बार-बार डुबकी लगाने को करता है।

‘ये दिल मांगे मोर…’तारीख थी 19 जून और साल 1999, कैप्टन विक्रम बत्रा के नेतृत्‍व में सेना पाकिस्‍तानी घुसपैठियों को पॉइंट 5140 से खदेड़ दिया था।

यह युद्ध नीति के हिसाब से भारत की सबसे बड़ी जीत थी, क्योंकि ये कारगिल का सबसे ऊंचा पॉइंट था।

चढ़ाई सीधी थी और यहीं ऊपर छिपे बैठे घुसपैठ‍िए सैनिकों पर गोली बरसा रहे थे।

लेकिन कैप्‍टन बत्रा इसके बाद रुके नहीं।

वह अगले पॉइंट 4875 के लिए चल दिए, जो समुद्र तल से 17 हजार फीट की ऊंचाई पर था।

कैप्‍टन बत्रा अपनी हर जीत के बाद कोड में कहते थे ‘ये दिल मांगे मोर…’ ‘तुम हट जाओ, तुम्‍होर बीवी बच्‍चे हैं’कैप्‍टन बत्रा की साहस के कई किस्‍से हैं।

उन्‍हें साथी नवीन 7 जुलाई के उस मनहूस दिन को यादकर करते हुए कहते हैं, ‘बंकर में मैं उनके साथ था।

गोलीबारी हो रही थी।

एक बम मेरे पैर के पास आकर फट गया।

मैं बुरी तरह घायल हो गया।

कैप्‍टन ने मुझे वहां से तुरंत हटा लिया।

मेरी जान बच गई।

मुझसे कहा कि तुम हट जाओ, तुम्हारे बीवी-बच्चे हैं।

लेकिन इसके आधे घंटे बाद ही कैप्टन ने एक दूसरे अफसर को बचाते हुए अपनी जान कुर्बान कर दी।

‘ये लो माधुरी दीक्ष‍ित के प्‍यार के साथ…’नवीन बताते हैं कि पाक‍िस्‍तान के घुसपैठ‍िए भी उनसे खौफ खाते थे।

युद्ध के दौरान एक बार एक पाकिस्तानी घुसपैठिया चिल्लाया।

बोला, हमें माधुरी दीक्षित दे दो।

हम नरमदिल हो जाएंगे।

इस बात पर कैप्टन बत्रा ने अपनी एके-47 से गोलियां बरसाते हुए मुस्‍कुराकर कहा, ये लो माधुरी दीक्षित के प्यार के साथ।

वह घुसपैठ‍िया सैनिक वहीं ढेर हो गया।

विक्रम बत्रा ने कारगिल युद्ध में जाने से पहले कहा था, ‘या तो मैं लहराते तिरंगे के पीछे आऊंगा, या तिरंगे में लिपटा हुआ आऊंगा।

पर मैं आऊंगा जरूर।

‘ आख‍िरकार उनकी बात सच साबित हुई।

लेकिन जाते-जाते उन्‍होंने तिरंगे का मान इतना बढ़ा दिया कि यह देश हमेशा उनका कर्जदार रहेगा।

1996 में जॉइन की मिलिट्री अकादमीविक्रम बत्रा ने 1996 में देहरादून की इंडियन मिलिट्री अकादमी जॉइन की थी।

वह मानेकशॉ बटालियन का हिस्‍सा थे।

19 महीने की ट्रेनिंग के बाद 6 दिसंबर 1997 को वह जम्‍मू एंड कश्‍मीर राइफल्‍स के 13वीं बटालियन (13 JAK RIF) में लेफ्ट‍िनेंट के पद पर तैनात हुए।

उन्‍हें आगे की ट्रेनिंग के लिए जबलपुर भेजा गया, जहां से 1998 के मार्च महीने में उनकी पोस्‍ट‍िंग बारामुला, सोपोर में हुई।

गिरधारी लाल बत्रा और कमलकांत बत्रा की तीसरी संतान कैप्‍टन विक्रम बत्रा बचपन से ही होनहार थे।

वह स्‍कूल के दिनों में ही कराटे में ग्रीन बेल्‍ट पा चुके थे।

कॉलेज में वह नैशनल कैडेट कोर यानी NCC की एयर विंग का हिस्‍सा थे।

कहते हैं कि शहीद होने के ठीक पहले कैप्‍टन बत्रा के आख‍िरी शब्‍द थे- जय माता दी।

अभ‍िषेक बच्‍चन भी निभा चुके हैं किरदारकैप्‍टन विक्रम बत्रा पर ‘शेरशाह’ पहली बायॉपिक है।

जबकि इससे पहले 2003 में कारगिल पर बनी जेपी दत्ता की फिल्म ‘LOC कारगिल’ में भी कैप्टन विक्रम बत्रा की तरह एक किरदार था।

इसे अभिषेक बच्चन ने निभाया था।

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