OTT ने खत्म की रीजनल और मेनस्ट्रीम फिल्मों के बीच की दूरी 1

OTT ने खत्म की रीजनल और मेनस्ट्रीम फिल्मों के बीच की दूरी

OTT ने खत्म की रीजनल और मेनस्ट्रीम फिल्मों के बीच की दूरी 2

‘मिस इंडिया’, ‘द ग्रेट इंडियन किचन’, ‘कर्नन’, ‘नवरस’, पिछले कुछ समय में हिंदी प्रदेशों में भी साउथ इंडियन और अन्य क्षेत्रीय फिल्मों की चर्चा काफी बढ़ी है।

इसकी एक बड़ी वजह ये है कि अब की वजह से ये फिल्में अपने राज्य से निकलकर दुनिया भर के दर्शकों तक पहुंच रही हैं।

ऐसे में, कहना गलत न होगा कि ओटीटी ने क्षेत्रीय और मेनस्ट्रीम फिल्मों के बीच की खाई मिटा दी है।

एक रिपोर्ट: ”मिस इंडिया’, ‘पावा कढाइगल’, ‘द ग्रेट इंडियन किचन’, ‘कर्नन’, ये फिल्में देख चुकी हूं और सब बहुत पसंद आईं।

ओटीटी पर ऐसी और अच्छी साउथ इंडियन फिल्मों के नाम सुझाएं।

‘ मयूर विहार निवासी पीआर प्रफेशनल प्रियंका ने पिछले दिनों फेसबुक पर जब ये पोस्ट डाली, तो कॉमेंट बॉक्स में ‘सुपर डीलक्स’, ‘नायट्टू’, ‘कुरुथी’, ‘दृश्यम 2’ जैसी तमाम फिल्मों की लिस्ट लोगों ने शेयर कर दी।

कुछ वक्त पहले हिंदी फिल्म डायरेक्टर हंसल मेहता ट्विटर पर मलयालम फिल्म ‘द ग्रेट इंडियन किचन’ की तारीफ के पुल बांधते दिखे।

वहीं, हाल ही में ओटीटी पर दस्तक देने वाली ‘सरपट्टा परमबराई’, ‘द डिसाइपल’ और ‘नवरस’ जैसी क्षेत्रीय फिल्में हिंदी प्रदेशों के सिनेप्रेमियों के बीच भी चर्चा का विषय रहीं।

ऐसे में, कहना गलत न होगा कि कभी महज अपने राज्यों तक सीमित रहने वाली क्षेत्रीय भाषा की फिल्में अब पूरे देश के दर्शकों के दिलों में पैठ बनाने लगी हैं और इसका श्रेय जाता है, तीसरे पर्दे यानी ओटीटी को।

पिछले कुछ सालों में ओटीटी घर-घर में अपनी पहुंच बना चुका है।

वहीं, बीते साल कोरोना महामारी के बाद देश में सिनेमाघर बंद होने के चलते जिस तरह कई बॉलिवुड फिल्मों ने सीधे ओटीटी का रुख किया, वैसे ही तमिल, मलयालम, तेलुगु, मराठी, बंगाली फिल्में भी सीधे ओटीटी पर पहुंची और उसके जरिए अच्छा कॉन्टेंट देखने के शौकीन दर्शकों तक।

ग्लोबल कॉन्टेंट देखने वाले ये दर्शक अच्छे कॉन्टेंट के मामले में न तो भाषा का बंधन रखते हैं, न ही क्षेत्र का, इसलिए पिछले डेढ़-दो सालों में दिल्ली, मुंबई, यूपी समेत देश के तमाम राज्यों में भी तमिल, तेलुगु, मलयालम, मराठी, बंगाली फिल्मों का क्रेज काफी बढ़ा है।

ओटीटी पर कामयाबी की दास्तान लिख रहीं क्षेत्रीय फिल्में
ओटीटी पर क्षेत्रीय फिल्मों की सफलता का अंदाजा उनकी लगातार बढ़ती रिलीजेज की संख्या से भी लगाया जा सकता है।

अभी इसी शुक्रवार नेटफ्लिक्स पर विजय सेतुपति की ‘तुगलक दरबार’ (तमिल-तेलुगु), एमेजॉन प्राइम विडियो पर ‘टक जगदीश’ (तेलुगु), जी फाइव पर क्रिकेटर हरभजन सिंह की डेब्यू साइंस फैंटेसी फिल्म ‘डिक्कीलूना’ (तमिल) और ‘नेट’ (तेलुगु) रिलीज हुई हैं।

वहीं, अगले हफ्ते डिज्नी हॉटस्टार पर अंधाधुन की रीमेक ‘मायस्ट्रो’ (तेलुगु), विजय सेतुपति और तापसी पन्नू की बहुभाषी फिल्म ‘एनाबेल सेतुपति’, जी फाइव पर एमी विर्क-सोनम बाजवा की हिट पंजाबी फिल्म ‘पुआडा’ और परमब्रत चटर्जी, रिद्धि सेन स्टारर बंगाली फिल्म ‘सामंतरल’ आ रही है।

कई भाषाओं के कॉन्टेंट का खूब लुत्फ उठा रही है ऑडियंस
नेटफ्लिक्स इंडिया की डायरेक्टर फिल्म्स एंड लाइसेंसिंग प्रतीक्षा राव कहती हैं, ‘ये बहुत ही एक्साइटिंग समय है, जब किसी भी भाषा का कॉन्टेंट कहीं भी सफल हो सकता है।

नेटफ्लिक्स पर ऑडियंस हिंदी के साथ मराठी, तमिल, तेलुगु, मलयालम जैसी कई भाषाओं के कॉन्टेंट का खूब लुत्फ उठा रही है।

‘जगामे थंडीरम’ (तमिल), ‘नायट्टू’ (मलयालम), ‘अंधागारम’ (तमिल), ‘द डिसाइपल’ (मराठी), ‘एंथालजी नवरस’ (तमिल), ‘पिट्टा कथालु’ (तेलुगु), ‘पावा कढाइगल’ (तमिल), ‘सिनेमा बंदी’ (तेलुगु), ‘मंडेला’ (तमिल) जैसी क्षेत्रीय भाषा की फिल्में भारत ही नहीं, कई दूसरे देशों में भी खूब पंसद की गईं।

हम अपने प्लैटफॉर्म पर क्षेत्रीय फिल्मों के लिए दुनिया भर में जबरदस्त प्यार देख रहे हैं।

जैसे, पहले हफ्ते में मणि रत्नम और जयेन्द्र पंचपाकेसन की ‘एंथॉलजी नवरस’ के 40 प्रतिशत से ज्यादा दर्शक इंडिया से बाहर से थे।

धनुष स्टारर ‘जगामे थंडीरम’ को भी पहले हफ्ते में जितने दर्शक इंडिया में मिले, उतने ही विदेशों में भी।

ये फिल्म अंग्रेजी, स्पैनिश, फ्रेंच, पुर्तगीज में डब की गई थी।

नेटफ्लिक्स का टॉप 10 सेगमेंट दिखाता है कि देश और विदेश में लोग क्या देखना पसंद कर रहे हैं।

नवरस मलेशिया, श्रीलंका समेत 10 देशों में टॉप टेन में था, तो ‘जगामे थंडीरम’ मलेशिया, यूएई, सिंगापुर, बांग्लादेश समेत में 12 देशों में टॉप 10 में रहा।

ऐसे में, हम अपनी रीजनल सिनेमा की सूची को आने वाले समय में और विस्तृत और बेहतर कर रहे हैं।

‘ इस साइट पर बीते साल अल्लु अर्जुन की ‘अला वैकुंठपुरामुल्लू’ (तेलुगु), ‘कन्नुम कन्नुम कोलैयाडीथाल’ (तमिल), ‘काप्पेला’ (मलयालम), ‘मिस इंडिया’ (तेलुगु) जैसी फिल्में भी खूब पसंद की गईं।

50 फीसदी ऑडियंस उनके होम स्टेट के बाहर से है
वहीं, एमेजॉन प्राइम विडियो के प्रवक्ता बताते हैं, ‘तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड जैसी हमारी क्षेत्रीय भाषा की फिल्मों ने व्यूअरशिप के सारे रेकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

खास बात ये है कि इन फिल्मों की 50 फीसदी ऑडियंस उनके होम स्टेट के बाहर से आती हैं।

हमारे प्लैटफॉर्म पर हाल में रिलीज ‘नरप्पा’ (तेलुगु), ‘सरपट्टा परमबराई’ (तमिल) और ‘मलिक’ (मलयालम) जैसी साउथ इंडियन फिल्में देश के 3200 से ज्यादा शहरों और 150 से ज्यादा बाहरी देशों में देखी गईं।

मराठी फिल्म फोटो प्रेम और वेल डन बेबी को भी दुनिया भर के दर्शकों ने सराहा।

‘मलिक’, ‘दृश्यम’, ‘सोरारई’ ‘पोट्टरु’, ‘कुरुथी’, ‘सरपट्टा परमबराई’, ‘नरप्पा’ जैसी फिल्मों के सफलता के बाद हम आगे भी लगातार अच्छी क्षेत्रीय फिल्में लेकर आ रहे हैं।

भाषा नहीं, अब अच्छा कॉन्टेंट देखते हैं दर्शक एमेजॉन प्राइम विडियो के प्रवक्ता के मुताबिक, अब दर्शक भाषा नहीं, अच्छे कॉन्टेंट को तरजीह देते हैं।

वह कहते हैं, ‘आज की ऑडियंस यूनिक और प्रयोगधर्मी कॉन्टेंट देखना चाहती है, इसके लिए वे अपनी भाषा के कंफर्ट से बाहर आने को तैयार हैं।

अब अच्छी कहानियों के लिए दर्शक अब भाषा का बंधन नहीं देखते।

अगर स्टोरी दमदार है, अलग है और ओरिजिनल है, तो वह ऑडियंस को पसंद आती है, फिर भाषा या क्षेत्र कोई भी हो।

इस बदलाव के पीछे एक बड़ा कारण ये भी है कि पहले साउथ इंडियन या क्षेत्रीय फिल्में अपने होम मार्केट के बाहर बहुत ही सीमित रिलीज होती थीं, जबकि ओटीटी ने उन्हें दुनिया भर के दर्शकों तक पहुंचा दिया है।

निश्चित तौर पर ओटीटी ने अलग-अलग जॉनर, अलग-अलग भाषा का कॉन्टेंट मुहैया कराकर भाषा और क्षेत्र की खाई खत्म की है।

ओटीटी ने मिटाई, भाषा की खाई
ऐक्ट्रेस श्वेता प्रसाद बसु का कहना है कि पहले दूसरे राज्यों के थिएटर्स में क्षेत्रीय फिल्में रिलीज नहीं होती थीं, तो लोग इन फिल्मों तक पहुंच नहीं पाते थे, लेकिन ओटीटी के आने के बाद ऑडियंस हर भाषा, हर क्षेत्र, हर देश का सिनेमा देख रही है।

ओटीटी पर खास तौर पर इन्हें अलग-अलग भाषाओं के सब-टाइटिल के साथ लाया जाता है, इसलिए भाषा, क्षेत्र की ये लाइनें धुंधली हुई हैं।