बढ़ा वजन.. सफेद बाल.. अब इतने बदल गए उदय चोपड़ा, नहीं पहचान पाएंगे आप 1

बढ़ा वजन.. सफेद बाल.. अब इतने बदल गए उदय चोपड़ा, नहीं पहचान पाएंगे आप

बढ़ा वजन.. सफेद बाल.. अब इतने बदल गए उदय चोपड़ा, नहीं पहचान पाएंगे आप 2

‘धूम’ फिल्म में फिट बॉडी… ‘मोहब्बतें’ में क्यूट स्माइल… बॉलिवुड की तमाम फिल्मों में कुछ ऐसे दिखने वाले ऐक्टर उदय चोपड़ा (Uday Chopra) काफी समय से फिल्मों से दूर हैं, लेकिन जब उन्हें हाल ही में मुंबई में एक जगह पर स्पॉट किया गया तो उन्हें पहचानना मुश्किल ( looked unrecognisable) हो गया।

फिट बॉडी और क्यूट स्माइल से इतर उदय बहुत ज्यादा बदले हुए नज़र आए।

मास्क की वजह से उनका चेहरा आधा ढका हुआ था, लेकिन उनके बाल सफेद हो चुके हैं।

वजन बहुत बढ़ गया है।

इन तस्वीरों को देखकर आप यकीन नहीं करेंगे कि ये वही उदय चोपड़ा हैं।

उदय लाइमलाइट से दूर रहना पसंद करते हैं।

उन्हें हाल ही में पपाराजी ने स्पॉट किया तो उन्हें पहचान पाना बेहद मुश्किल था।

उदय लंबे समय से लॉस एंजेलिस में थे, जहां वो एक आलीशान विला में ठहरे हुए थे।

एक इंटरनेशनल न्यूज पोर्टल के मुताबिक, उदय साल 2018 में अपना LA वाला घर बेचने वाले थे।

ऐसा लग रहा है कि वो मुंबई वापस आ गए हैं।

उदय ने साल 2000 में ‘मोहब्बतें’ फिल्म से ऐक्टिंग की दुनिया में कदम रखा था।

इसके बाद वो ‘धूम’ की सीरीज में नज़र आए, जो हिट हैं।

वो बड़े पर्दे पर आखिरी बार साल 2013 में रिलीज हुई ‘घूम 3’ में दिखाई दिए थे।

उदय ने फिल्मों से ब्रेक लिया और US में शिफ्ट हो गए, जहां वो एक प्रोडक्शन कंपनी की देखभाल कर रहे थे, जो ‘द लॉन्गेस्ट वीक’ (2014) और निकोल किडमैन स्टारर मूवी ‘ग्रेस ऑफ मोनाको’ (2015) जैसे प्रोजेक्ट्स का हिस्सा रही है।

साल 2014 में उदय चोपड़ा और नरगिस फाखरी के रिलेशनशिप की अफवाह उड़ी थी, लेकिन इस कपल ने कभी भी अपने रिश्ते को लेकर बात नहीं की।

हालांकि, पिछले साल नरगिस ने अपने रिश्ते के बारे में बातचीत की थी और कहा था, ‘उदय और मैंने 5 साल तक एक-दूसरे को डेट किया।

वो इंडिया में मिले सबसे अच्छे इंसान में से एक हैं।

मैंने कभी इस रिश्ते पर बात नहीं की, क्योंकि लोगों ने मुझे चुप रहने को कहा था।

मुझे इस बात का खेद है।

मुझे माउंटेन के टॉप पर जाकर चिल्लाना चाहिए था कि मैं इतनी खूबसूरत शख्सियत के साथ हूं।

इंटरनेट और सोशल मीडिया बहुत फेक है।

वहां के लोगों को पता नहीं चलेगा कि सच्चाई क्या है।

अक्सर हम ऐसे लोगों को आइडिलाइज कर लेते हैं, जो बंद दरवाजों के पीछे वास्तव में बहुत बुरे होते हैं।