पश्चिम बंगाल में कोरोना से कम मौतों के बावजूद मृत्यु दर में बढ़ोतरी दिखाई गई | जानें पूरा मामला 1

पश्चिम बंगाल में कोरोना से कम मौतों के बावजूद मृत्यु दर में बढ़ोतरी दिखाई गई | जानें पूरा मामला

West Bengal Corona News: सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में उन लोगों के परिवारों के लिए मुआवजे की मांग वाली एक याचिका पर सुनवाई की है, जिनकी कोरोना या कोरोना के परिणामस्वरूप मौत हो गई.
याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि केंद्र को अनुग्रह भुगतान प्रदान करना चाहिए. आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 12 और 2015 की अधिसूचना का हवाला देते हुए पीड़ितों के रिश्तेदारों में से प्रत्येक को 4 लाख दिया जाए.

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल ने 22 जून से 16 जुलाई (औसत 1.81%) के बीच मृत्यु दर में 1.5 गुना वृद्धि दिखाई है, इससे पहले 21 जून को यह 1.71 फीसदी थी. लेकिन स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग, पश्चिम बंगाल द्वारा जारी बुलेटिन के अनुसार, साप्ताहिक कोरोना सकारात्मकता दर और राज्य में रिपोर्ट किए गए संक्रमण के कारण होने वाली मौतों की संख्या बाद में कम हो गई है. 
बंगाल में, 18-24 जून के सप्ताह के दौरान साप्ताहिक सकारात्मकता दर 4.04 फीसदी थी. बाद में 9-15 जुलाई के सप्ताह में यह गिरकर 1.78 फीसदी पर आ गया.

मृत्यु दर में वृद्धि की तुलना में, 9-15 जुलाई के सप्ताह के दौरान दर्ज किए गए औसत दैनिक मामले घटकर 912 पर गिर गए हैं. 18-24 जून के दौरान यह 2148 था. दर्ज की गई मौतों की संख्या में भी काफी कमी आई है. 18-24 जून के सप्ताह में कुल 334 मौतों से 9-15 जुलाई के सप्ताह में 103 मौतें हुई है.

पूर्व कैबिनेट मंत्री और टीएमसी नेता मदन मित्रा के अनुसार, पश्चिम बंगाल बहुत अच्छी स्थिति में है. उन्होंने आगे बीजेपी पर साजिश का आरोप लगाया था. उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि यह बीजेपी का एक और चाल है जैसे चुनाव में हमें हराने का मकसद था. उसके बाद उन्होंने हमें फंडिंग या टीकाकरण नहीं देने और लोगों को ऐसे ही मरने देने का फैसला किया.”

टीएमसी नेता ने आगे कहा कि मामले की जांच के लिए एक जांच कमेटी का गठन किया जाएगा. उन्होंने कहा, “मैं सुब्रत बख्शी, पार्थ चटर्जी और दीदी से हर अस्पताल पर निगरानी रखने का अनुरोध करता हूं. जल्द ही एक जांच समिति होगी.”

सीपीआईएम के नेता फुआद हलीम के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में मुआवजे की याचिका के बाद भी सरकार आंकड़ों में हेराफेरी कर रही है. उन्होंने कहा, “सरकार ने जिस तरह से आंकड़े तैयार किए हैं…प्रशासन की लगातार उसमें हेराफेरी करने की प्रवृत्ति लाभ उठाने के लिए हैं. वास्तव में, हमने देखा कि कोविड हताहतों की संख्या और पीड़ा आंकड़ों से बाहर हैं. यह हमेशा एक समस्या रही है, जैसे-जैसे हम दूसरी लहर से तीसरी लहर की ओर बढ़ रहे है.”

विभाग द्वारा जारी बुलेटिन के अनुसार, मार्च 2021 के बाद पहली बार, कोलकाता सहित कई जिलों ने पिछले सप्ताह में एक दिन शून्य कोविड मौतों की सूचना दी थी. केंद्र प्रतिबद्धता बनाने से संकोच कर रहा है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार कोरोना से मरने वालों की संख्या (लगभग 4 लाख) को देखते हुए यह तर्क दिया गया है कि लगभग उन परिवारों को 4 लाख रुपये का भुगतान व्यवहारिक नहीं हो सकता है.

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