Labour Codes: क्या 4 श्रम संहिताओं के बदल जाएंगे नियम? नए श्रम मंत्री कर रहे रिव्यू 1

Labour Codes: क्या 4 श्रम संहिताओं के बदल जाएंगे नियम? नए श्रम मंत्री कर रहे रिव्यू

Labour Codes: क्या 4 श्रम संहिताओं के बदल जाएंगे नियम? नए श्रम मंत्री कर रहे रिव्यू 2

नई दिल्लीउद्योग की कुछ चिंताओं को दूर करने के प्रयास में सरकार चार श्रम संहिताओं (Labour Codes) के तहत प्रस्तावित नियमों पर फिर से विचार कर रही है।

सूत्रों ने इकनॉमिक टाइम्स को बताया है कि भूपेंद्र यादव () ने प्रस्तावित नियमों की समीक्षा शुरू कर दी है कि क्या किसी बदलाव की जरूरत है।

जल्द ही मंत्री द्वारा उद्योग निकायों और ट्रेड यूनियनों से परामर्श करने की संभावना है।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के मुताबिक, अधिकारियों ने नए मंत्री को नियमों के बारे में एक प्रेजेंटेशन दिया है।

इसमें कोई भी सुधार करना उनका विशेषाधिकार है।

चार संहिताओं में शामिल, वेतन संहिता और सामाजिक सुरक्षा संहिता का उद्योग के लिए रोजगार की लागत पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।

सरकार ने भत्तों को वेतन के 50% पर सीमित कर दिया है, जिससे इंप्लॉयर्स द्वारा उच्च ग्रेच्युटी भुगतान की संभावना है।

इंप्लॉयर्स चाहते हैं ग्रेच्युटी पेमेंट में ‘ग्रैंडफादरिंग क्लॉज’इंप्लॉयर्स का प्रतिनिधित्व करने वाली इंडस्ट्री बॉडीज ने सरकार से ग्रेच्युटी भुगतान के लिए एक ‘ग्रैंडफादरिंग क्लॉज’ पेश करने की मांग की है क्योंकि कोड्स के तहत ‘वेतन’ की नई परिभाषा से प्रति कर्मचारी लागत में काफी वृद्धि होगी।

उन्होंने नई वेतन परिभाषा के तहत कुछ फ्लेक्सिबिलिटी की भी मांग की है, जिसने वेतन के 50% पर भत्ते को सीमित कर दिया है।

गिग वर्कर्स के लिए जल्द से जल्द सामाजिक सुरक्षा चाहती हैं ट्रेड यूनियन्स दूसरी ओर, ट्रेड यूनियन चाहती हैं कि सरकार गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा को जल्द से जल्द अधिसूचित करे, भले ही कोड के कार्यान्वयन में अधिक समय लग रहा हो।

श्रम मंत्रालय की योजना कर्मचारी राज्य बीमा निगम के तहत कर्मचारियों और नियोक्ताओं द्वारा योगदान किए गए पैसे से दस लाख गिग श्रमिकों को हेल्थ कवर प्रदान करने की है।

यूनियनों ने प्रस्तावित 12-घंटे की दैनिक शिफ्ट पर भी चिंता जताई थी और लंबे समय से वैधानिक नेशनल फ्लोर-लेवल न्यूनतम वेतन को जल्द से जल्द लागू करने पर जोर दे रही हैं।

सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि लेबर कोड्स से न ही कर्मचारियों का कल्याण प्रभावित हो और न ही उद्योग पर वित्तीय या अनुपालन बोझ बढ़े।

यह भी पढ़ें: जल्द ही राज्यों के साथ बैठकश्रम मंत्रालय ने इस साल मार्च में सभी चार संहिताओं में अपने डोमेन के तहत नियम बनाए थे।

नए लेबर कोड्स 1 अप्रैल से लागू होने वाले थे।

हालांकि, ऐसा हो नहीं सका क्योंकि कोई भी राज्य अपने डोमेन में नियमों के साथ तैयार नहीं था।

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि राज्यों की एक बैठक भी बुलाए जाने की संभावना है ताकि उन्हें अपने क्षेत्र में नियम बनाने में तेजी लाने के लिए कहा जा सके, जिससे संहिताओं को जल्द से जल्द लागू किया जा सके।

बता दें कि केंद्र ने 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को चार श्रम संहिताओं में समेकित किया है।

इनमें मजदूरी संहिता; सामाजिक सुरक्षा संहिता; औद्योगिक संबंध संहिता व व्यावसायिक, सुरक्षा, स्वास्थ्य और काम करने की स्थिति संहिता शामिल हैं।

संसद ने 2020 में चार में से तीन श्रम संहिताओं को पारित किया था, जबकि को 2019 में ही मंजूरी दे दी गई थी।

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