सिर्फ इनकम बढ़ने से भारत में गरीबी दूर करने में नहीं मिलेगी मदद 1

सिर्फ इनकम बढ़ने से भारत में गरीबी दूर करने में नहीं मिलेगी मदद

सिर्फ इनकम बढ़ने से भारत में गरीबी दूर करने में नहीं मिलेगी मदद 2

नई दिल्ली Poverty In India: भारत में लोगों की गरीबी का स्तर (Poor Peoples) अलग अलग है।

अगर भारत में जाति और सामाजिक समूह के हिसाब से बात करें तो भारत के गरीब लोगों का जीवन अफ्रीका के गरीब लोगों के साथ मैच करता है।

यूनाइटेड नेशन डेवलपमेंट प्रोग्राम (UNDP) के ग्लोबल मल्टीडाइमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स 2021 के हिसाब से यह जानकारी सामने आई है।

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भारत में करीब 28 फ़ीसदी लोग मल्टीडाइमेंशनल गरीबी में जी रहे हैं।

दुखद बात यह है कि अनुसूचित जन जाति और अनुसूचित जाति के लोगों में गरीबी सबसे अधिक है।

अगर बात अनुसूचित जनजाति के लोगों की करें तो उनमें से करीब आधी आबादी और अनुसूचित जाति के एक तिहाई लोग मल्टीडाइमेंशनल गरीबी का सामना कर रहे हैं।

अन्य पिछड़ा वर्ग में इस तरह की गरीबी का सामना करने वाले लोगों की संख्या 27 फीसदी है जबकि अनारक्षित आबादी के करीब 15.6 फ़ीसदी लोग इस तरह की गरीबी का सामना कर रहे हैं।

अगर बात हर जाति के गरीब लोगों की करें तो वे सभी एक जैसी स्थिति में रह रहे हैं।

कोरोना संकट ने बढ़ाई मुश्किल
भारत में जहां करीब 28 फ़ीसदी लोग मल्टीडाइमेंशनल गरीबी का सामना कर रहे हैं, वहीं करीब 19.30 फ़ीसदी लोग और अधिक मुश्किल में हैं।

इस सर्वे के हिसाब से कोरोनावायरस संकट के पहले इतने लोग गरीबी का सामना कर रहे थे।

कोरोनावायरस संकट के बाद मल्टीडाइमेंशनल और बढ़ा है।

दुर्भाग्य से कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के किए गए लॉकडाउन के दौर में जिन बच्चों का स्कूल छूट गया, उन पर मुसीबत टूट पड़ी है।

बढ़ते आर्थिक दबाव की वजह से लोगों की गरीबी और बढ़ी है।

मल्टीडाइमेंशनल गरीबी क्या है? आमतौर पर गरीबी को आमदनी के हिसाब से नापा जाता है।

कुछ साल पहले योजना आयोग ने कहा था कि अगर कोई व्यक्ति रोजाना ₹33 से कम में गुजारा करता है तो भारत में उसे गरीब माना जा सकता है।

ग्लोबल मानदंड के हिसाब से अगर कोई भारत में रोजाना 1.9 डॉलर या ₹130 से कम में गुजारा करता है तो उसे गरीब माना जा सकता है।

यह गरीबी को नापने का वन डाइमेंशनल अप्रोच है।

इसमें रियल लाइफ पॉवर्टी का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।

वास्तविक जीवन में गरीबी का अनुमान लगाने के लिए कई चीजों को शामिल किया जा सकता है।

गरीबी के अलग-अलग लेवल
मसलन अगर कोई व्यक्ति है और वह निरक्षर है, किसी ऐसे इलाके में रह रहा है जहां साफ-सफाई, बिजली और नल का पानी नहीं है तो वह व्यक्ति अत्यधिक गरीब की श्रेणी में आ सकता है।

उसकी तुलना में अच्छे स्वास्थ्य और कुछ औपचारिक शिक्षा वाले समान आमदनी वाले लोगों की गरीबी का लेबल अलग होता है।

किसी व्यक्ति को गरीबी से बाहर निकालने के लिए सरकार को कई मुद्दों पर एक साथ काम करना चाहिए।

इसमें सब्सिडी वाला पोषक खाद्य पदार्थ, शिक्षा, बिजली, पानी जैसी चीजें उपलब्ध कराए जाने की जरूरत है।

इस हिसाब से कहा जा सकता है कि सिर्फ आमदनी बढ़ाने के जरिए भारत में गरीबी दूर करने में मदद मिलने की उम्मीद नहीं है।

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