पेटीएम के चाइनीज निवेश और डाटा को लेकर संसदीय पैनल JPC ने की पूछताछ 1

पेटीएम के चाइनीज निवेश और डाटा को लेकर संसदीय पैनल JPC ने की पूछताछ

पेटीएम के चाइनीज निवेश और डाटा को लेकर संसदीय पैनल JPC ने की पूछताछ 2

फिनटेक कंपनी पेटीएम में चाइनीज निवेश को लेकर संसदीय पैनल ने पूछताछ की है। पता चला है कि पेटीएम की ओर से सीनियर मैनेजमेंट पैनल के सामने हाजिर हुआ था। पैनल ने निवेश के साथ यह भी कहा कि जिस सर्वर पर ग्राहकों का डेटा स्टोर होता है वह भारत में होना चाहिए।

पेटीएम के शीर्ष अधिकारी हुए पेश

जानकारी के मुताबिक संसद की संयुक्त समिति (JPC) के सामने पेटीएम के शीर्ष अधिकारी पूछताछ में शामिल हुए। इसमें पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन बिल को भी लेकर सवाल हुआ। पेटीएम ने प्रस्तावित कानूनों जैसे मैनेजमेंट और विदेशों में सेंसिटिव पर्सनल डाटा से संबंधित प्रमुख मुद्दों पर अपना सुझाव सबमिट किया है।

अगर पेटीएम भारतीय है तो विदेश में क्यों डेटा स्टोर करती है

पैनल के सदस्यों में अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के सदस्य थे। पेटीएम से यह भी पूछा गया कि अगर वह भारतीय फर्म है तो फिर ग्राहकों का डेटा विदेश में कैसे स्टोर करती है। पैनल के सदस्यों ने कहा कि अगर ऐसा कोई सर्वर है तो उसे भारत में होना चाहिए। साथ ही पैनल ने पेटीएम के निवेश के बारे में भी पूछताछ की।

हितों के टकराव को भी लेकर सवाल हुआ

पैनल के सदस्यों ने पेटीएम से यह भी सवाल किया कि क्या कोई हितों का टकराव भी हो रहा है? क्योंकि पेटीएम खुद अपना प्रोडक्ट अपने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बेचता है। पेटीएम ने कहा कि पर्सनल डाटा और सेंसिटिव डाटा विदेशों में इसलिए भेजा जाता है क्योंकि जब इस तरह के ट्रांसफर के लिए डाटा प्रिंसिपल की स्पष्ट सहमति दी जाती है तो प्रोसेसिंग के उद्देश्य के लिहाज से यह भेजा जाता होगा।

इससे पहले कई कंपनियों के अधिकारी हाजिर हुए

बता दें कि इससे पहले फेसबुक, ट्विटर, अमेजन के अधिकारी पैनल के सामने पेश हो चुके हैं। जबकि टेलीकॉम कंपनियों जैसे रिलायंस जियो, एयरेटल और कैब कंपनियां ओला और उबर से भी कहा गया है कि वे पैनल के सामने पेश हों। इस पैनल की प्रमुख भाजपा की नेता मिनाक्षी लेखी हैं। पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन बिल को लोकसभा में 11 दिसंबर 2019 को लाया गया था। इस बिल में व्यक्तिगत लोगों के पर्सनल डाटा को प्रोटेक्ट करने और डाटा प्रोटेक्शन अथॉरिटी को स्थापित करने का प्रावधान था।

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पेटीएम से यह भी पूछा गया कि अगर वह भारतीय फर्म है तो फिर ग्राहकों का डेटा विदेश में कैसे स्टोर करती है। पैनल के सदस्यों ने कहा कि अगर ऐसा कोई सर्वर है तो उसे भारत में होना चाहिए