देसी अचार का भविष्य अब रेस्तरां के हाथ में क्यों जा सकता है? 1

देसी अचार का भविष्य अब रेस्तरां के हाथ में क्यों जा सकता है?

देसी अचार का भविष्य अब रेस्तरां के हाथ में क्यों जा सकता है? 2

नई दिल्ली
किसी रेस्तरां में जाकर खाना खाने के बाद आप अपने प्लेट में पड़े अचार के छोटे से टुकड़े को जरुर चखना चाहते हैं।

हो सकता है कि आपके खाने की टेबल पर पहले से ही किसी जार में अचार पड़ा हो या आपको वेटर से इसे मांगना पड़ेगा।

जैसे ही आप अचार टेस्ट करते हैं आपको निराशा हाथ लगती है।

यह अधिक नमक वाला, बहुत खट्टा या बेकार सा अचार हो सकता है।

रेस्तरां के पास एक्चुअली बढ़िया अचार उपलब्ध कराने के लिए बहुत कम गुंजाइश होती है।

किसी ग्राहक की प्लेट में अचार रखने के लिए रेस्तरां पैसे चार्ज नहीं कर सकते।

कुछ बंगाली रेस्तरां टमाटर और खजूर की चटनी के लिए चार्ज करते हैं, लेकिन वह ग्राहकों को इस उद्देश्य से परोसा जाता है कि खाने वाला अपनी प्लेट बिल्कुल चट कर जाए।

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ताज ग्रुप के चेन्नई के एक रेस्टोरेंट में ग्राहकों के वेलकम एक्सपीरियंस के लिए पिकल कार्ट शुरू किया है।

मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनस रेलवे स्टेशन पर भी पंचम पूरीवाला के पास हर टेबल के लिए ताजे बने हुए अचार के बाउल रखे हुए हैं।

रेस्तरां में आमतौर पर आपको अच्छा अचार तभी मिल सकता है जब शेफ उसमें व्यक्तिगत रूप से रुचि लें।

अन्यथा बाजार में बिकने वाले अचार से ही रेस्तरां काम चलाते हैं।

बाजार में बिकने वाले अचार
वाणिज्यिक रूप से तैयार किए जाने वाले अचार अलग होते हैं जबकि परंपरागत रूप से घरों में बनने वाले अलग होता है।

पश्चिमी और मध्य पूर्व के देशों में अचार में विनेगर डाला जाता है।

क्योंकि इससे अच्छा काफी समय तक चलता है।

भारत में बनने वाले अचार में मसाले और तेल का प्रयोग किया जाता है जो स्वाद के लिहाज से बेहतरीन होता है।

भारतीय अचारों में डाले जाने वाले तेल में मसाले घुल जाते हैं और इसलिए उनका स्वाद बेहतरीन लगता है।

आयल एक अच्छा प्रिजर्वेटिव नहीं है, लेकिन अगर अचार को ठीक से पैक कर रखा जाए तो इससे वातावरण में मौजूद बैक्टीरिया और फंगस आदि से बचाया जा सकता है।

अचार बनाने की कला देसी अचार बनाने वाली भारतीय महिलाएं बाउल में ऊपर तैरने वाले तेल को निकाल लेती हैं।

इसका एक तरीका है जिसमें स्पेशल चम्मच से उसे अलग किया जाता है।

बाजार में बिकने वाले अचार में यह संभव नहीं है, इसलिए वह उसमें एक्स्ट्रा विनेगर और प्रिजर्वेटिव डाल देते हैं।

इस वजह से उनका स्वाद सही नहीं लगता।

अब जब देश में बहुत कम लोग घर पर अचार बना रहे हैं और अचार बनाने की कला युवाओं के हाथ में नहीं आ रही है।

भारत के लोगों में परंपरागत रूप से बनने वाले अचार का स्वाद खत्म हो रहा है।

किसान मेले से उम्मीदें
अब लोग अचार खरीदने के लिए व्यापार मेले और किसान बाजार का रुख कर रहे हैं।

कोरोना महामारी की वजह से लोगों के घर में बंद रहने की वजह से अब दोबारा अचार बनाने का ट्रेंड शुरू हुआ है।

बहुत से लोग वाणिज्यिक रूप से बेचने के लिए अचार बनाने लगे हैं।

घर में बने हुए खाने दूसरे लोगों तक बेचे जाने लगे हैं और इस प्रक्रिया में अचार की बिक्री भी बढ़ने लगी है।

सोशल मीडिया की मदद से लोगों को अचार बनाने और उसे बेचने में काफी मदद मिल रही है।

बहुत से रेस्तरां भी देसी अचार सर्व करने से लेकर उसे बेचने में जुट गए हैं।

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