क्या पोस्को से हाथ मिलाकर रतन टाटा और लक्ष्मी मित्तल को सीधे टक्कर दे पाएंगे गौतम अडानी? 1

क्या पोस्को से हाथ मिलाकर रतन टाटा और लक्ष्मी मित्तल को सीधे टक्कर दे पाएंगे गौतम अडानी?

क्या पोस्को से हाथ मिलाकर रतन टाटा और लक्ष्मी मित्तल को सीधे टक्कर दे पाएंगे गौतम अडानी? 2

नई दिल्ली
दिग्गज उद्योगपति गौतम अडानी (Gautam Adani) की अगुवाई वाला अडानी समूह (Adani Group) अब स्टील बिजनस में भी उतरने की तैयारी में है।

इसके लिए उसने दक्षिण कोरिया की स्टील कंपनी पोस्को (POSCO) के साथ एक समझौता किया है।

इसके मुताबिक 5 अरब डॉलर के अनुमानित निवेश से गुजरात में एक इंटिग्रेटेड स्टील प्लांट लगाया जाएगा।

अडानी ग्रुप के स्टील बिजनस में उतरने से उनका मुकाबला टाटा ग्रुप (Tata Group) और आर्सेलरमित्तल (ArcelorMittal) से होगा।

अडानी ने पोस्को के साथ समझौते पर खुशी जताते हुए कहा कि पोस्को स्टील बनाने वाली दुनिया की अत्याधुनिक कंपनी है।

उसे स्टील प्रोडक्शन के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन कम करने में भी महारत हासिल है।

अडानी ग्रुप अभी रिन्यूएबल एनर्जी, हाइड्रोजन, लॉजिस्टिक्स, पोर्ट मैनेजमेंट, एयरपोर्ट मैनेजमेंट और रोड इंफ्रास्ट्रक्चर के बिजनस में है।

अब वह स्टील बिजनस में भी हाथ आजमा रहा है।

पोस्को का भारत में बिजनस
दक्षिण कोरिया की कंपनी पोस्को के पास पोस्को महाराष्ट्र नाम की एक यूनिट है जिसमें 1.8 मिलियन टन की क्षमता वाला कोल्ड रोल और गैल्वनाइज्ड यूनिट शामिल है।

इसके साथ ही पुणे, दिल्ली, चेन्नई और अहमदाबाद में कंपनी के चार प्रोसेसिंग प्लांट स्थित हैं।

देरी और स्थानीय स्तर पर विरोध के कारण कंपनी को ओडिशा में 12 अरब डॉलर की परियोजना को रद्द करना पड़ा था।

पोस्को भारत में एक ग्रीनफील्ड प्लांट लगाने को लेकर उत्सुक है।

स्टील बिजनस पर क्यों है नजर
सरकार ने भारत को 2025 तक 5 लाख करोड़ डॉलर की इकॉनमी बनाने का लक्ष्य रखा है और इसमें स्टील इंडस्ट्री की भूमिका को अहम माना जा रहा है।

EY-CII की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह इंडस्ट्री सालाना पांच-छह परसेंट की सालाना दर से बढ़ रही है।

सरकार का जोर इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास पर है जिससे स्टील की मांग बढ़ने की पूरी उम्मीद है।

देश की जीडीपी में स्टील सेक्टर की हिस्सेदारी दो फीसदी है और इसमें 5 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है।

भारत दुनिया में स्टील का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।

उपभोग के मामले में भारत दुनिया में तीसरे नंबर पर है।

स्टील का इस्तेमाल कंस्ट्रक्शन, कैपिटल गुड्स, ऑटोमोटिव, इंटरमीडिएट प्रोडक्ट्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और रेलवे में होता है।

हाल के वर्षों में भारत में स्टील का आयात घटा है।

सरकार देश में स्पेशिएलिटी स्टील के लिए PLI स्कीम लाई है।

टाटा स्टील से मुकाबला
स्टील सेक्टर में अडानी ग्रुप का सीधा मुकाबला टाटा स्टील (Tata Steel) से होगा।

यह देश की सबसे प्रमुख और सबसे पुरानी स्टील कंपनियों में से एक है।

देश में इसकी सालाना क्षमता 34 मिलियन टन है।

उसकी योजना 2030 तक इसे 55 मिलियन टन पहुंचाने की है।

कंपनी का बिजनस 100 से अधिक देशों में फैला है और दुनियाभर में उसके कर्मचारियों की संख्या 660,800 से अधिक है।

कंपनी के 26 देशों में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स हैं।

आर्सेलरमित्तल से लेना होगा लोहा
स्टील सेक्टर में जगह बनाने के लिए अडानी ग्रुप को टाटा के अलावा कई और कंपनियों से भी लोहा लेना पड़ेगा।

इनमें आर्सेलरमित्तल (ArcelorMittal) भी शामिल है।

दुनिया के अरबपतियों में शामिल लक्ष्मी निवास मित्तल की अगुवाई वाली इस कंपनी की भारत में सालाना उत्पादन क्षमता 10 मिलिटन टन है।

यह कंपनी उत्पादन के हिसाब से दुनिया की सबसे बड़ी स्टील और माइनिंग कंपनी है।

दुनियाभर में इसकी कुल सालाना क्षमता 119 मिलियन टन है।

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