April 21, 2021
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कोरोनावायरस को पंच और इकॉनमी को बूस्ट, जानिए आरबीआई का सॉलिड प्लान

कोरोनावायरस को पंच और इकॉनमी को बूस्ट, जानिए आरबीआई का सॉलिड प्लान 1

कोरोनावायरस को पंच और इकॉनमी को बूस्ट, जानिए आरबीआई का सॉलिड प्लान 2

नई दिल्लीरिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी मॉनीटरी पॉलिसी मीटिंग में नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया है लेकिन कोरोना संक्रमण (Covid-19 pandemic) की दूसरी लहर से लड़ने में इकॉनमी की मदद के लिए कई उपायों की घोषणा की है। आरबीआई की मॉनीटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) की तीन दिन तक चली बैठक के बाद आरबीआई के गर्वनर (RBI Governor) शक्तिकांत दास ने मीटिंग में लिए गए फैसलों की जानकारी दी। आरबीआई ने कहा कि हमारा जोर कोरोनावायरस के नए संक्रमण को रोकने और इकनॉमिक रिवाइवल पर होना चाहिए। वित्त वर्ष 2022 की पहली मॉनीटरी पॉलिसी में आरबीआई ने साथ ही कुछ ऐसे नए उपायों की घोषणा की है जिनसे इकॉनमी को कोरोनावायरस की दूसरी लहर से निपटने में मदद मिलेगी और इकॉनमिक रिवाइवल का रास्ता साफ होगा। आइए जानते हैं उन उपायों के बारे में.. -ऑन टैप लिक्विडिटी फैसलिटी की डेडलाइन बढ़ाकर 30 सितंबर तक कर दी गई है। पहले यह 31 मार्च तक थी। लॉन्गर टर्म रेपो रेट ऑक्शंस से बैंकों को एक्सेस लिक्विडिटी मैनेज करने में मदद मिलेगी। -केंद्रीय बैंक की एमपीसी ने साथ ही फैसला भी किया है कि सेकेंडरी गवर्नमेंट सिक्योरिटीज मार्केट को और आगे एक्सटेंड किया जाएगा। -नाबार्ड, नैशनल हाउसिंग बैंक और सिडबी जैसे वित्तीय संस्थानों के लिए स्पेशल रिफाइनेंस फैसिलिटी को 2021-22 के दौरान 50 हजार करोड़ रुपये की फ्रेश लेंडिंग के साथ एक्सटेंड कर दिया गया है। -पेमेंट्स बैंक के लिए दिन के अंत में अधिकतम बैलेंस 1,00,000 रुपये से बढ़ाकर 2,00,000 रुपये कर दिया गया है। इसका मतलब है कि पेमेंट्स बैंक अब किसी व्यक्ति से 2 लाख रुपये डिपॉजिट ले सकते हैं जो मौजूदा सीमा का दोगुना है। -आरटीजीएस और एनईएफटी की सुविधा पहले बैंकों को ही हासिल थी। अब दूसरी एंटिटीज को भी इनके इस्तेमाल की अनुमति होगी। केंद्रीय बैंक ने फिनटेक और पेमेंट्स कंपनियों की इन दो सेंट्रलाइज्ड पेमेंट सिस्टम्स का हिस्सा बनने की अनुमति दे दी है। -आरबीआई ने फुल केवाईसी प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स की इंटरऑपरेबिलिटी को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव रखा है। -केंद्रीय बैंक ने साथ ही फुल केवाईसी पीपीआई में आउटस्टेंडिंग डिपॉजिट की सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये करने का भी प्रस्ताव रखा है। -राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए वेज एंड मीन्स लिमिट 46 फीसदी बढ़ाकर 47010 करोड़ रुपये कर दी गई है। इससे राज्यों को कोरोना की दूसरी लहर से निपटने में मदद मिलेगी। अंतरिम वेज एंड मीन्स एंडवांसेज को भी सितंबर तक बढ़ाकर 51560 करोड़ रुपये कर दिया गया है। -गवर्नर शक्तिकांत दास ने फाइनेंशियल इनक्लूजन का लेवल नापने के लिए एक फाइनेंशियल इनक्लूजन इंडेक्स बनाने की घोषणा की। हर इंडेक्स हर साल जुलाई में पब्लिश किया जाएगा।

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